दा नांग के समुद्र पर एक नया दिन
अगर आप दा नांग जाएं, तो सुबह करीब 5 बजे जल्दी उठकर समुद्र तट पर जाएं, आपको एक शांत और सच्चा दा नांग महसूस होगा।
जब सूरज की पहली किरणें भी नहीं आतीं, स्थानीय लोगों की चहल-पहल शुरू हो जाती है। लोग टहलते, दौड़ते, साइकिल चलाते, व्यायाम करते या सुबह-सुबह समुद्र में नहाते हैं। हवा ताज़ी, लहरों की मंद आवाज़ और समुद्र की नमकीन खुशबू।

तट के किनारे चलते हुए आप जाल खींचती टोकरी-नावों और रात की मछली पकड़कर लौटती नौकाओं को देख सकते हैं। मछुआरे ताज़ी मछली, झींगे और स्क्विड की टोकरियाँ मिलकर ढोते हैं। समुद्र तट पर मछली बाज़ार में खरीद-बिक्री की हँसी-ठिठोली गूँजती है।

दा नांग में कम से कम एक सुबह समुद्र के साथ जागकर बिताएं, तब पता चलेगा कि शहर की सुंदरता सिर्फ इसके मशहूर पुलों या समुद्र तटों में नहीं, बल्कि तस्वीर-सी चमकती भोर और लहरों की आवाज़ में नया दिन शुरू करते लोगों की सौम्य, जीवंत लय में भी है।

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