स्वतंत्रता और शरीर की गर्माहट के बीच― साइगॉन की दोपहर, एक बिल्ली के साथ
मैंने अफवाहें सुनी थीं, पर मुझे नहीं लगा था कि तुम सचमुच यहाँ होगे। उसी कैफ़े में, जिसे मैं काम पर ध्यान लगाने के लिए रखती हूँ, तुम मौजूद हो।

स्वभाव से तुम्हें सतर्क होना चाहिए, फिर भी तुम दबे पाँव नहीं, सीधे चले आए। हौले से मेरी गोद में कूद पड़े और नाज़ भरी आवाज़ निकाली। "मज़ाक है क्या, यह तो दस्तावेज़ पढ़ने की जगह है," मन ही मन विरोध करते हुए भी मैं तुम्हारे रोएँ सहला रही हूँ। मुलायम, और गर्म। मुश्किल है। नापसंद नहीं है। बल्कि अच्छा लगता है। पर—बहुत अच्छा लगने लगे तो खतरा है। मैं जानती हूँ। एक बार पाल लिया तो बस, मैं अपनी सारी प्राथमिकताएँ तुम्हारे इर्द-गिर्द बदल दूँगी। दावतें, सफ़र, यहाँ तक कि समयसीमाएँ भी—

उस गर्माहट के सामने सब बेढंगे पड़ जाएँगे, ऐसा ही होगा... हाँ। इसलिए मैं नहीं पालूँगी। अभी नहीं पालूँगी। पति के साथ भी यही तय किया है। पर भविष्य की मैं जाने कैसी होगी? क्या अपनी आज़ादी बचाए रख पाऊँगी? या उस नरम-नरम तुम्हारे आगे हार मान लूँगी? ...खैर, जब वह समय आएगा तब देखा जाएगा। फ़िलहाल आज तो, मैं दस्तावेज़ के तीसरे पन्ने से दोबारा पढ़ना शुरू करती हूँ।

पर मेरा पसंदीदा कैफ़े—अब यहाँ ध्यान नहीं लगा पाऊँगी, यही सोचकर थोड़ी चिंता है। प्रवास जीवन रैंकिंग
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